आज दिनांक 20 जुलाई 2024 को हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में प्रोफेसर पुनीत बिसारिया, आचार्य, हिंदी विभाग, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी ने शिक्षकों, विद्यार्थियों के साथ सिनेमा और साहित्य के आपसी संबंध पर वार्ता की।
स्वागत प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी, वरिष्ठ आचार्य एवं अध्यक्ष, हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग ने किया उन्होंने बताया कि उन्होंने 'द फिल्म फाउंडेशन ट्रस्ट' की स्थापना की है। जिसके अंतर्गत फिल्म यूनिवर्सिटी की स्थापना करना ट्रस्ट का उद्देश्य है। जिससे बेहतरीन विषयों पर शॉर्ट फिल्म, डॉक्युमेंट्री और फिल्में बनाकर उनसे समाज को कोई बेहतर संदेश दिया जा सके। उन्होंने कहा कि सिनेमा समाज का सबसे सशक्त माध्यम है अपनी बात पहुंचाने का। सिनेमा विस्तृत माध्यम है। आज के समय में सिनेमा हमारे जीवन का अभिन्न अंग है, जीवन के सुख-दुख, हंसी-खुशी, जन्म मृत्यु सभी का हिस्सेदार सिनेमा है। सिनेमा ने मनुष्य को भीतर तक प्रभावित किया है। मिर्जापुर और पंचायत जैसी वेब सीरीज लोकप्रियता के बड़े आयाम स्थापित करती है क्योंकि उनकी सामाजिक स्वीकार्यता बनती है। आजादी के आंदोलन में भी सिनेमा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समय के साथ सिनेमा अपने उद्देश्यों से भटक गया। सिनेमा में सस्तापन, नग्नता और मसाला शामिल हो गया। जैनेंद्र ने कहा कि साहित्य दूध और सिनेमा ताड़ी है। जिस कारण साहित्य और सिनेमा की दूरी बनी। साहित्य और सिनेमा का संबंध बहुत पुराना है। सिनेमा बिना साहित्य के जिंदा नहीं रह सकता। जो सिनेमा में 2 से 3 घंटे में अपनी बात को सफलतापूर्वक दिखा सकता है वही सिनेमा में सफल हो सकता है। साहित्यकार में कैमरे की आंख से कहानी को देखने की योग्यता होनी चाहिए। जनता की नब्ज़ पकड़नी चाहिए। फिल्मकार को कहानी की आत्मा से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। गीतकार फिल्मी घटनाक्रम को समझते हैं इसलिए वह फिल्मों में सफल रहे। फिल्म रोजगार का एक मजबूत विकल्प है। साहित्य और फिल्म भी समझ भी होनी चाहिए साहित्य के साथ जोड़कर फिल्में सफल हो सकती हैं।
धन्यवाद ज्ञापन डॉक्टर अंजू ने किया इस अवसर पर विभाग के शिक्षक डॉ प्रवीण कटारिया, डॉ आरती राणा, डॉक्टर यज्ञेश कुमार, शोधार्थियों में विनय कुमार, पूजा, पूजा यादव, सचिन कुमार, रेखा सोम और एम ए के विद्यार्थियों में बॉबी, प्रतीक्षा, एकता, रिया, विक्रांत, नेहा, प्रिंसी आदि छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।