जरुरी सूचना

आप सभी का मंथन पत्रिका के इन्टरनेट संस्करण पर स्वागत है ।

Free Website Templates

Monday, September 5, 2011

मुझे भारत बहुत अच्छा लगता है -अर्चि शर्मा



यूरोप में आयोजित हिन्दी ज्ञान प्रतियोगिता में चयनित छः देशांे के 12 विद्यार्थी तथा उज्वेकिस्तान के 8 विद्यार्थियों का एक दल ‘अक्षरम्‘ नई दिल्ली भारतीय सांस्कृतिक परिषद के पदाधिकारियों के साथ भारत भ्रमण कार्यक्रम के अन्तर्गत चै0 चरण सिंह विश्वविद्यालय के हिन्द विभाग में प्रातः 11 बजे पहुँचा। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय तथा विदेशी विद्यार्थियों के बीच वैचारिक आदान-प्रदान भी हुआ। 
कार्यक्रम में विदेश से आये सभी विद्यार्थियों ने अपना परिचय तथा हिन्दी भाषा को सीखने के दौरान हुए अनुभवों को भी साझाा किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में लंदन से आई अर्चि शर्मा ने अपना परिचय देते हुए कहा कि मुझे भारत बहुत अच्छा लगता है। इसके साथ ही यहाँ के लोग और संस्कृति तथा तीज-त्यौहारों से मुझे बेहद लगाव है। इस अवसर पर उन्होंने एक कविता भी सुनाई - ‘‘चाहे पथ पर शूल बिछा दो। इसके बाद रूस से आई पोलीना रीजोवा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि- ‘‘मुझे भारत अच्छा लगता है। इन्होंने मंगलेश डबराल की कविता सुनाई। उज्वेकिस्तान के जावेद दनजिदेव ने इस मौके पर कबीर का एक दोहा पढ़कर सुनाया। हंगरी से आई ऐगनेर आगोस्तोन ने भारत देश को बहुत अच्छा बताया साथ ही उन्होंने ‘कस्तूरी कुण्डल बसे‘ नामक दोहा भी सुनाया। रूस से आई लीडिया आहीपोवा ने कहा कि मैं मास्को राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी सीख रही हूँ तथा उन्हें हिन्दी के विद्याथियों से मिलकर बेहद प्रसन्नता हुई। इसके साथ उन्होंने सभी विद्यार्थियों को रूस आने का निमंत्रण भी दिया। 
लंदन से आई ऋतु बरोलिया ने कहा कि मैं भारत की संस्कृति को समझना चाहती हूँ इसलिए हिन्दी पढ़ रही हूँ। इस अवसर पर उन्होंने सुभद्रा कुमारी चैहान की कविता झाँसी की रानी की कुछ पंक्तियाँ सुनाई ‘‘सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने मृकुटी तानी थी उज्बेकिस्तान के नजारो व एलवेक ने अपना परिचय देते हुए ‘‘कुछ-कुछ होता है‘‘ फिल्म का गाना सुनाकर सभी का मुग्ध कर दिया। विदेशी छात्रों के दल संचालक नरेश शांडिल्य ने बताया कि हम आई0सी0सी0आर0 तथा ‘अक्षरम्‘ संस्था की ओर से प्रतिवर्ष विदेशी बच्चों को ताजमहल, बनारस, प्रयाग, हरिद्वार, संसद भवन आदि ऐतिहासिक तथा धार्मिक स्थलों का भ्रमण कराते हैं। जिससे कि इन देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान हो सके। उन्होंने हिंदी के प्रति विदेशी बच्चों के उत्साह जोश और प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। इस अवसर पर शशि वालियाँ ने भी विदेशी बच्चों के गरम-जोशी से स्वागत के लिए हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो0 नवीन चन्द्र लोहनी का आभार व्यक्त किया। बुल्गारिया से आई मोना कौशिक ने कहा कि रूस तथा अन्य देशों के विद्यार्थी भारत घूमने के लिए आये इसके लिए मैं अक्षरम् व हिन्दी विभाग को धन्यवाद देती हूँ पूर्व शिक्षा संकाय अध्यक्ष प्रो0 के0जी0 शर्मा ने कहा कि हिंदी विश्व भाषा बनने की योग्यता रखती है तथा इस भाषा में भारत की हजारों वर्ष की परम्पराएँ, शिक्षा, संस्कार, ज्ञान, सुरक्षित है। इब समय आ गया कि लोग हिंदी की ताकत को पहचाने। विज्ञान संकाय अध्यक्ष प्रो0 एच0एस0 सिंह ने अपने निजी अनुभव साझाा किए तथा साथ ही अपनी हंगरी यात्रा के अनुभवों को प्रस्तुत किया। वनस्पति विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो0 वाई0 विमला ने कहा कि मैंने हंगरी जाकर वहाँ की भाषा सीखी तथा उन्होंने यह भी कहा कि भाषा के सम्मुख कोई जाति, वर्ग आड़े नहीं आता है। भाषा के माध्यम से हमारी अभिव्यक्त तथा भावनाएँ एकाकार हो जाती है। इस अवसर पर हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो0 नवीन चन्द्र लोहनी ने विदेशी छात्रों का स्वागत करते हुए कहा कि भाषा पर कोई बैरियर नहीं होता। ये देश भले ही भौगोलिक सीमाओं में बँटे हुए हों ये सीमाएँ हमने बनाई है। भाषा इन सभी सीमाओं तथा बन्धनों को तोड़कर विश्व को एकाकार होने का सन्देश देती है। हिन्दी विभाग के छात्र मोनू सिंह ने कहा कि मैं विदेशी विद्याथियों के हिन्दी भाषा के प्रति अनुराग एवं सीखने की मुक्त कण्ठ से सराहना की साथ ही कहा कि आज वैश्विक रूप में हिन्दी एक नई ताकत एवं उर्जा के रूप में उभर रही है। जिसे सारी दुनियाँ ने स्वीकार किया है। एम0फिल् की छात्रा प्रगति ने विदेशी छात्रों का स्वागत किया। एम0ए0 की छात्रा कौशल कुमारी ने भी स्वागत किया। 
इस अवसर पर राजनीति विभाग की प्रो0 अर्चना शर्मा तथा समाजशास्त्र विभाग के प्रो0 कुलानुशासक योगेन्द्र सिंह ने विदेशी विद्यार्थियों को विभागीय पत्रिका मंथन की एक-एक प्रति भेट की। इसके बाद विदेशी छात्रों के दल चै0 चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एच0सी0 गुप्ता के निवास स्थान पर भेंट की तथा इस अवसर पर कुलपति महोदय ने वि0वि0 परिवार की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया। 
कार्यक्रम का समापन हिन्दी साहित्य कुटीर में साहित्यकारों की प्रतिमाओं के दर्शन के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन डाॅ0 सीमा शर्मा ने किया। इस अवसर पर डाॅ0 अशोक मिश्र, डाॅ0 रविन्द्र कुमार, मोनू सिंह, अंजू, आरती राणा, ललित सारस्वत, चरनसिंह, राहुल कुमार, प्रगति, सुजाता, दिलीप शर्मा, कौशल कुमार, शिवानी, मिलिन्द, आयुषी, पूजा आदि उपस्थित रहे।  
























हिन्दी विभाग में आयोजित विशेष व्याख्यान ‘‘विदेशों में हिन्दी अध्यापन(बल्गारिया के विशेष सन्दर्भ में)‘‘ : डाॅ0 मौना कौशिक


हिन्दी भाषा और साहित्य को लेकर हिन्दी वालों में एक खास भावना घर कर गई है, ये भावना हमें मिटानी होगी। अगर हिन्दी माध्यम से पढ़े-लिखे बच्चे न्यूयार्क तक पहुँच सकते हैं तो आप भी इस बुलन्दी को छू सकते हैं। ये विचार आज चै0 चरण सिंह विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में आयोजित विशेष व्याख्यान ‘‘विदेशों में हिन्दी अध्यापन(बल्गारिया के विशेष सन्दर्भ में)‘‘ में सेंटर फार ईस्टर्न लेग्वेंजस एण्ड कल्चर डिपार्टमेंट आॅफ क्लासिक ईस्ट क्लीमेंर्स आख्रीद्स्की, सोफिया, बुल्गारियां में हिन्दी अध्यापन कर रही डाॅ0 मौना कौशिक ने व्यक्त किए। डाॅ0 मौना को पिछले 19 वर्षों से हिन्दी को विदेशी भाषा के रूप में पढ़ाने का अनुभव है। सन् 2008 में न्यूयार्क में हुए ‘विश्व हिन्दी सम्मेलन में भी इन्होंने शिरकत की। इनके द्वारा बनाए गए भारतीय संस्कृति पर आधारित विभिन्न पाठ्यक्रम सोफिया विश्वविद्यालय से स्वीकृत हुए हैं। साथ ही हनुमान चालीसा का अनुवाद/प्रकाशन, ‘भाषा बादल की छाया‘ हिन्दी कहावतों एवं मुहावरों का तथा ‘दादा-दादी की कहानियों का बल्गारियाई भाषा में हिन्दी से आप अनुवाद करा चुकी है। साथ ही बल्गारियाई टेलीविजन द्वारा 28 मिनट का वृत्ताचित्र भी इन्होंने तैयार किया। डाॅ0 मौना कौशिक की पहचान आज एक प्राध्यापक, अनुवादक, कवयित्री, लेखक, आयुर्वेद व योग अध्ययन-अध्यापन को लेकर है।
डाॅ0 मौना कौशिक ने कहा कि हमारी हिन्दी वर्णमाला के अक्षर दैविक है। हमारी लिपि की महानता है कि उसके प्रत्येक वर्ण में दिव्यता छिपी हुई है। इस कारण हिन्दी हमारे जीवन से जुड़ी है। हर स्वर-व्यंजन में शक्ति है कि वह आपकी नाडि़यों में ऊर्जा प्रवाहित कर सकता है। जो संस्कृत मन्त्रों का काम है, वही हिन्दी का काम है। उन्होंने बताया कि बल्गारिया में हिन्दी पढ़ाते हुए हम वर्णमाला से ही अक्षर ज्ञान शुरू कराते हैं। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे ‘आ‘ स्वर से ‘आम‘ बनता है और ‘आम‘ का भारतीय संस्कृति में महत्व है क्योंकि धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों में यह शुभ माना जाता है और यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि विदेशों में वही लोग हिन्दी पढ़ रहे हैं जो भारतीय संस्कृति से जुड़ना चाहते हैं, जो भारतीय परंपराओं का सम्मान करते हैं। हिन्दी को लेकर न गर्व करने की बात है, नहीं अपमानित होने की। हम हिन्दी का सम्मान करंे। हिन्दी के साथ ही दूसरी भाषाओं को भी जानने-सीखने और प्रेम करने का आह्वान उन्होंने किया। डाॅ0 मौना कौशिक ने कहा कि हिन्दी आज आगे बढ़ रही है, वह केवल भाषा ही नहीं रह गई है, बल्कि व्यावसायिक बन रही है। हिन्दी साहित्य की विद्याओं के अनुवाद बल्गारियाई भाषा में हो रहे है। इस सन्दर्भ में उन्होंने अज्ञेय के उपन्यास ‘शेखर एक जीवनी‘ का नाम लिया।
प्रवासी साहित्य को उन्होंने भारत के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि बल्गारियाई भाषा में प्रवासी साहित्य न के बराबर है, बल्कि अमेरिका, कैनेडा में ज्यादा है। प्रवासी लेखन की खासियत बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रवासी साहित्यकार दुनियां के किसी भी कोने में हिन्दी के माध्यम से पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश-विदेश को संकुचित रूप में देखना छोड़ना होगा। प्रवासी साहित्य पर काम करने से वहाँ बैठे लोग लेखक से जुड़ रहे है।
उन्होंने बताया कि बल्गारिया में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में हिन्दी फिल्मों का महत्वपूर्ण योगदान है, विशेषकर हिन्दी फिल्मों के गीतों का प्रस्तुतीकरण बहुत अहम् है। हिन्दी फिल्म ‘लगान‘ को देखकर ही बल्गारिया में महिलाओं ने क्रिकेट खेलना शुरू किया। डाॅ0 कौशिक ने बताया कि हिन्दी भाषा के शब्द हिन्दी फिल्मों के माध्यम से दूसरे देशों में जा रहे हैं। इसके साथ ही हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आयुर्वेद और योग का भी खासा योगदान है, इन्हीं के माध्यम से लोग ‘वात-पित्त -कफ को जानते हैं और वहाँ ‘प्रणाम, नमस्ते, धन्यवाद आदि शब्दों का प्रचार-प्रसार भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही आध्यात्मिकता भी भाषा के प्रचार-प्रसार का माध्यम है।
इस अवसर पर हिन्दी विभागध्यक्ष प्रो0 नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि दो तरह के प्रवासी आज दिखाई दे रहे हैं, पहले वे जिन्हें भारत से जबरिया ले जाया गया और वे फिजी, सूरीनाम आदि देशों में बस गए। वे भारतीय मूल के थे, अब वह उनका मूल देश है, क्योंकि उनके पूर्वज भारत के थे। दूसरे वे है जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी, भाषा के व्यवसाय के सन्दर्भ में अपनी रूचि से गए। आर्थिक समृद्धि के लिए गए, फिर वहाँ जाकर साहित्य रचना भी करने लगे। अभी यह जानना अहम मुद्दा है कि प्रवासी लेखक कौन है ? क्योंकि यह संक्रमण काल है। इस अवसर पर प्रो0 लोहनी ने डाॅ0 मौना कौशिक का आभार व्यक्त किया।
हिन्दी विभाग के शिक्षक डाॅ0 सीमा शर्मा, डाॅ0 रवीन्द्र कुमार, अंजू, आरती राणा तथा छात्र-छात्राओं में शिवानी, कौशल, मोहनी, कपिल, पूजा, मिलिन्द ब्रह्ममसिंह, चंचल, सोनू नागर, विनय, अंकित आदि मौजूद रहे।

हिन्दी विभाग में आकाशवाणी द्वारा आयोजित गोष्ठी- मेरठ का विकास : चुनौतियां और संभावनाएं

20 अगस्त 2011, मेरठ मण्डल का विकास: चुनौतियाँ और संभावनाएं

कार्यक्रम आधिकारी मनोहर सिंह रावत ने बताया कि  कार्यक्रम दिनाक २७ अगस्त २०११ दिन शनिवार को सांय 4 बजकर 5 मिनट से 5 बजकर 5 मिनट तक आकाशवाणी  के राजधानी चैनल 450.5 पर  666 KH पर प्रसारित किया जायेगा........

मेरठ, दिनांक 20 अगस्त 2011। चै0 चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के हिन्दी विभाग तथा आकाशवाणी, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आज हिन्दी विभाग में ‘मेरठ मण्डल का विकास: चुनौतियाँ और संभावनाएं‘ विषय पर  संगोष्ठी का आयोजन किया गया। आकाशवाणी के निदेशक श्री लक्ष्मी शंकर वाजपेई ने संगोष्ठी की रूपरेखा रखी, उन्होंने बताया कि आकाशवाणी ने कई शहरों, राज्यों में अपने कार्यक्रमों के माध्यम से विकास की पहल की और इसी सन्दर्भ में वे आज मेरठ आए हैं। उन्होंने बताया कि पूरे भारत वर्ष में संचार माध्यमों खास कर इलैक्ट्रोनिक माध्यमों में रेडियो जितने लोगों से जुड़ा है उस अनुपात में ओर कोई माध्यम नहीं है, साथ ही आकाशवाणी की विकास कार्यक्रमों से सन्दर्भ में प्रासंगिकता के विषय में भी अपने विचार रखते हुए विषय प्रवर्तन किया। हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो0 नवीन चन्द्र लोहनी ने सभी अतिथियों एवं गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत सम्बोधन किया तथा बुके भेंट कर उनका स्वागत किया।
चै0 चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एच0 सी0 गुप्ता ने कहा कि प्रसन्नता का विषय है कि आकाशवाणी दिल्ली ने मेरठ मण्डल के विकास की चुनौतियों और संभावनाओं पर आज यहाँ गोष्ठी आयोजित की है। जिससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास के साथ मेरठ के विकास को गति मिलेगी। कृषि, उद्योग, शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में मेरठ ने जो प्रगति की है वह अभूतपूर्व है, किंतु संसाधनों का नियोजन और उसके उपयोग को निश्चित करने के लिए समय-समय पर जो कार्य होने चाहिए उसके लिए निरंतर कार्यक्रम आधारित विकास की योजना बननी चाहिए। जिसकी अभी मेरठ को जरूरत है। इस क्षेत्र में पर्याप्त पानी, कृषि योग्य भूमि के चलते हरित क्रांति तो हुई किन्तु अब धीरे-धीरे कृषि योग्य भूमि का उपयोग अन्य कार्यों के लिए होने के कारण उसकी कमी हो रही है। जिससे पर्यावरण भी प्रभावित हो रहा है। मैं चाहता हूँ कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी हम पर्याप्त ध्यान दें। कभी कैची उद्योग के कारण प्रसिद्ध मेरठ आज चीनी मिलों, खेल, उद्योग, आभूषण प्रकाशन, हस्तकरघा, गुड, तेल, कागज, गत्ता, सूती वस्त्र, सहित कई नए क्षेत्रों में मुकाम स्थापित कर रहा है। 
मेरठ के सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने अपनी बात व्यवस्था में भ्रष्टाचार से मुक्ति से शुरू की तथा उन्होंने मण्डल के विकास और संभावनाओं के मद्देनजर प्रशासकीय संरक्षण और प्रोत्साहन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मेरठ प्रदेश में देश में तथा दुिनयां में अपनी एक विशेष छवि के लिए जाना जाता है तथा मेरठ मण्डल के विकास को नए सोपानों की ओर ले जाने के लिए बुनियादी ढांचा और परिवहन व्यवस्था (रेल, बस, सड़के) आदि पर भी संज्ञान लिया। माननीय सांसद ने मेरठ में औद्योगिक विकास के लिए मेरठ की छवि को सुधारने की ओर भी संकेत किया तथा उन्होंने मेरठ के फोक कल्चर (लोक संस्कृति तथा भाषाई प्रश्न को भी उठाया। उन्होंने मेरठ मण्डल के हस्तिनापुर क्षेत्र को रेल परिवहन से भी जोड़ने की बात कही तथा कृषि आधारित उद्योगों एवं चै0 चरण सिंह के ग्राम नूरपुर में खाद्य प्रसंस्करण निर्मित कराने की बात कही। अंत में उन्होंने कहा कि मेरठ असीम संभावनाओं से भरा क्षेत्र है जिस में कृषि, उद्योग, शिक्षा एवं बुनियादी ढांचे को मजबूत कर सभी क्षेत्रों में विकास किया जा सकता है।
मेरठ मण्डलायुक्त श्री भुवनेश कुमार ने अपनी बात आरम्भ करते हुए कहा कि हमारे देश में विगत 25 वर्षें में प्रत्येक क्षेत्र में बहुत उन्नति की है। इस उन्नति को हम तुलनात्मक ढंग से बेहतर समझ सकते हैं। उन्होंने मेरठ मण्डल को अन्य शहरों और प्रान्तों की तुलना में बहुत समृद्ध बताया। उन्होंने कहा कि फिर भी मेरठ में विकास की अनन्त संभावनाएं हैं। बिजली, सड़के, रेलयातायात, शिक्षा, उद्योग धन्धे आदि में और निवेश की ओर ज्यादा आवश्यकता है। उन्होंने अपनी बातों को पुष्ट करते हुए आंकड़ों के आलोव में कई परियोजनाओं का भी जिक्र किया। मण्डलायुक्त ने मुख्य बिन्दु यातायात पर केन्द्रित किया। उन्होंने दिल्ली एक्सप्रेस वे डेली पैसिन्जर ट्रेन तथा अन्य कुछ विचाराधीन परियोजना पर भी विस्तार में प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने मेरठ क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों को भी विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद में हिण्डन नदी पर 29 करोड़ रूपये की लागत से एक पुल निर्माणाधीन है तथा मुरादनगर-मोदीनगर में लाई ओवर बनाने की योजना पर भी अमल किया जा रहा है। अन्त में उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि हम हीन भावना से ग्रस्त है। हमारा नजरिया नकारात्मक पूर्ण  है तथा मीडिया इसे बढ़ा-चढ़ा कर दिखाता है। उन्होंने मेरठ के विकास के लिए सकारात्मकता एवं मिल-जुलकर एक इकाई के रूप में कार्य करने का सुझाव दिया तथा यह भी बताया कि मेरठ देश के प्रगतिशील शहरों की सूची में चैथे स्थान पर है। इस अवसर पर मेरठ के प्रसिद्ध टाउन प्लानर जागेश कुमार ने मेरठ के विकास के लिए परिवहन व्यवस्था पर बल दिया तथा उन्होंने उचित ढंग से सुनियोजित विकास के लिए सरकारी व्यवस्था को दोषी बताया। 
उद्योग जगत से जुडे श्री पंकज गुप्ता ने मेरठ मण्डल के विकास के लिए तथा औद्योगिक विकास के लिए भयमुक्त वातावरण तथा शहर की अच्छी छवि को मुख्य कारक बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र का विकास मुख्यतः औद्योगिक ढांचे पर निर्भर करता है। इन्फास्ट्रक्चर की कमी भी औद्योगिक विकास के आडे आती है। इसके साथ ही बिजली, सुरक्षा व्यवस्था, जल निकासी, आग नियंत्रण, वाटर सलाई आदि पर भी विशेष बल दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि मेरठ शहर में कृषि विश्वविद्यालय होने के बावजूद भी यहाँ फूड प्रोसेसिंग उद्योग नहीं है जिस क्षेत्र में अनंत संभावनाएं विद्यमान है। जिसके विकास से मेरठ के विकास को गति मिलेगी। 
अधिवक्ता सुश्री शाहीन परवेज ने मेरठ मण्डल के विकास में गरीब और मलिन बस्तियों के विकास की जरूरत बताई। उन्होंने मेरठ शहर की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि हम धर्म, जाति-पाति, भेदभाव में बँटे हुए हैं। जब तक इन समस्याओं से निजात नहीं मिलेगी तब तक मेरठ के विकास की बात करना बेमानी है। उन्होंने कहा कि मेरठ भूमाफियाओं, स्वार्थी नेताओं और बहुसंख्यक अज्ञानी लोगों के हाथ में है। अतः में बुद्धि जीवियों से आहवान करती हूँ कि इस दिशा में सार्थक पहल की आवश्यकता है। उन्होंने मेरठ के विकास के लिए कमेले की निन्दा की तथा उन्होंने मेरठ के कैंची उद्योग तथा छोटी-छोटी गलियों में चल रहे कुटीर उद्योगों के क्रियान्वयन के लिए उचित बुनियादी जरूरतों पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि अमीर लोग तो पैसे के बल पर अपने लिए सभी सुविधाएं जुटा लेते हैं किन्तु गरीब एवं मलिन बस्तियों में जो अनाधिकृत कालोनियों में बुनियादी सुविधाएं नहीं पहँुचती। मेरठ के पूरे विकास के लिए गरीब एवं मलिन बस्तियों के विकास को भी समझने की आवश्यकता है। 
विश्वविद्यालय के गणित विभागाध्यक्ष प्रो0 मृदुल कुमार गुप्ता ने मेरठ मण्डल के विकास के लिए शिक्षा पर बल दिया साथ ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के विकास को भी अपने एजेण्डे में सम्मिलित किया। अत्यधिक कार्यभार एवं वृहत् क्षेत्रफल की दृष्टि से उन्होंने मेरठ विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की बात कही और विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालयों में रिक्त पदों पर नियुक्ति को प्राथमिकता दी। 
संगोष्ठी के अन्तिम चरण में सुझाव और प्रश्नोत्तरी के तहत संगोष्ठी में शामिल शहर के गणमान्य और वरिष्ठ विशेषज्ञों के प्रश्नों को भी स्थान दिया गया। शहर के वरिष्ठ नागरिक एवं इतिहासविद् धर्म दिवाकर ने मेरठ मण्डल के विकास के लिए हस्तिनापुर को रेलवे लाईन से जोड़ने की बात कही। 
गिरीश शुक्ला ने मेरठ के विकास में पर्यावरण सन्तुलन पर विशेष बल दिया तथा शहर के प्रसिद्ध गजलकार एवं बिजली विभाग के पूर्व अभियंता किशन स्वरूप ने मेरठ के विकास के लिए नजरिया बदलने की बात कही तथा अमित पाठक ने मेरठ मण्डल के विकास के लिए पर्यटन के विकास पर बल दिया वाणिज्यकर आयुक्त ओ0पी0 रतूडी ने कहा कि मेरठ असीम संभावनाओं से भरा शहर है। इन सभी प्रश्नों के मण्डलायुक्त ने उत्तर दिए तथा भविष्य में भी समस्याओं के समाधान करने की बात कही। 
संगोष्ठी का संचालन आकाशवाणी की कार्यक्रम अधिकारी एवं उद्घोषिका ऋतु राजपूत तथा हिन्दी विभाग के शोधार्थी रवीन्द्र राणा ने किया। जिसमंे उनका सहयोग आकाशवाणी के अधिशासी अधिकारी मनोहर सिंह रावत ने किया। इस अवसर पर शहर के कई क्षेत्रों से जुडे गणमान्य व्यक्ति तथा वरिष्ठ नागरिक भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रो0 वाई विमला, प्रो0 योगेन्द्र सिंह, वित्त नियंत्रक अतुल कुमार सिंह, डाॅ0 ए0 के0 चैबे,  साथ ही हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डाॅ0 अशोक मिश्र, डाॅ0 सीमा शर्मा, डाॅ0 रवीन्द्र कुमार, एवं छात्र-छात्राओं में नरेन्द्र मिश्र, आरती, अंजू, मोनू सिंह, ललित सारस्वत, अमित, राहुल, चरणसिंह, मिलिन्द, मोहनी, कपिल, शिवानी, कौशल, मनीषा, सन्ध्या, पूजा, प्रगति, दिलीप शर्मा, पवन भारतीय, पिण्टू, अरूण गौतम आदि उपस्थित रहे। 







Wednesday, May 25, 2011

हिंदी विभाग के स्थापना दिवस कार्यक्रम पर आप सब को हार्दिक बधाई






















‘वैष्वीकरण से हिन्दी को कोई खतरा नहीं है: कुलपति’

‘हिन्दी विभाग के स्थापना दिवस समारोह में मंथन पत्रिका का विमोचन’

चौधरी चरण सिंह विष्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एन0 के0 तनेजा ने कहा कि वैष्वीकरण से हिन्दी को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि बाजारवाद ने आधुनिक काल में हाषिये पर गए लोगों का जितना चिन्तन किया उतना चिन्तन इनका अन्य किसी काल में नहीं हुआ है।  वह विष्वविद्यालय के नौवें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विभाग की पत्रिका ‘मंथन’ के विषेषांक का भी विमोचन किया। ‘21 वीं सदी की चुनौतियाँ और हिन्दी साहित्य विषय पर आयोजित संगोष्ठी को अध्यक्ष पद से संबोधित करते हुए प्रो0 तनेजा ने कहा कि विचारधारा और वैज्ञानिकता परस्पर दो किनारे हैं, यह कभी आपस में नहीं मिलते। आधुनिक काल में स्वहित विकास का एक बड़ा आधार बनकर उभरा है। स्वहित अनुषासित होना चाहिए जिसका साहित्य में भी वर्णन है। भाषा और साहित्य की विषयवस्तु सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हुई है। कुलपति ने हिन्दी विभाग की प्रषंसा करते हुए कहा कि अल्प साधानों से विभाग ने जो प्रगति की है, वह सराहनीय है। उन्होंने इसके लिए विभागाध्यक्ष, षिक्षकों और छात्र-छात्राओं की प्रषंसा की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गुरूकुल कांगड़ी विष्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो0 धर्मपाल आर्य ने कहा कि आधुनिक काल में भौतिकतावादी प्रवृतियों ने जीवन में अन्तर्विरोध पैदा कर मनुष्य को अवसाद की ओर धकेल दिया है। पाप-पुण्य, नैतिकता-अनैतिकता की कोई परिभाषा नहीं रही है। मनुष्य के जीवन का कोई मूल्य नहीं रहा है। इन सामाजिक स्थितियों ने साहित्यकारों को गहराई से झकझोरा है। इसके चलते साहित्य में व्यापक रूप से इन प्रवृत्तियों का शब्दांकन हुआ है। साहित्य में महिला आन्दोलन, दलित आन्दोलन और विविध काव्य आन्दोलन इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं जिनमें मनुष्य जीवन की विडम्बनाओं को रेखांकित किया गया है। उन्होंने कहा आज का साहित्य समाज को गहराई से अभिव्यक्त कर रहा है। 
विषिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल फोकलोर इंस्टीट्यूट, कनाडा के निदेषक प्रो0 वेदप्रकाष ‘वटुक’ ने कहा कि आज साम्राज्यवाद और आतंकवाद से कैसे बचा जा सकता है, इस विषय पर साहित्यकार को सोचना होगा। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा को सम्मान दिलाने के लिए हमें दूसरों की भाषा का सम्मान करना पड़ेगा। हिन्दी में बहुत से सिद्ध लोग हैं, जो प्रसिद्ध नहीं हैं। हमें हाषिये के उन लोगों को साहित्य में स्थान देना होगा। हिन्दी साहित्यकारों को यथार्थ का सामना करने के लिए भी तैयार करना होगा। विष्व में हिन्दी की जो स्थिति है, उस पर भी विचार करना होगा। तभी हिन्दी के सम्मान में और वृद्धि होगी। 
पत्रकार प्रदीप माण्डव ने कहा कि आज चारों स्तम्भ अपनी महत्ता और विष्वसनीयता खो चुके हैं इसलिए पाँचवे स्तम्भ के विषय मंे विचार करने की आवष्यकता है, उन्होंने कहा कि साहित्य और समाज दोनों के सरोकार समान हैं। उन्होंने कहा जिस तरह से पाठ्यक्रमों में साहित्य की महत्ता है उसी तरह सेल्यूलाइड साहित्य अर्थात फिल्मों को भी पाठ्यक्रमों में षामिल किया जाना चाहिए। 
कला संकायाध्यक्ष प्रो0 आर0 एस0 अग्रवाल ने कहा कि वैष्वीकरण की चुनौतियों से निपटने के लिए साहित्यकार आदर्ष प्रारूप जनमानस के समक्ष प्रस्तुत करें। वैष्वीकरण के प्रति साहित्यकार जनचेतना जागृत करें। 
कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि डॉ0 हरिओम पवांर ने ‘‘मैं भारत का संविधान हूँ, लाल किले से बोल रहा हूँ’ कविता सुनाकर कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। 
विभागाध्यक्ष प्रो0 नवीन चन्द्र लोहनी ने विभाग की प्रगति पर प्रकाष डालते हुए कहा कि विभाग के विद्यार्थियों ने जे0आर0एफ0 और नेट में उल्लेखनीय सफलता अर्जित की हैं। अनेक विद्यार्थी व्यावसायिक क्षेत्र में सम्मानजनक स्थान पर हैं। विभाग निरंतर विद्यार्थियों के चहुँमूखी विकास के लिए कार्यषाला, संगोष्ठी और अतिथि विद्वानों के व्याख्यान आयोजित करता रहता है। इस अवसर पर विभाग के प्रतिभाषाली विद्यार्थियों को कुलपति ने सम्मानित किया। सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से प्रारम्भ हुए इस कार्यक्रम में अतिथियों को कुलपति ने समृति चिह्न भेंट किए। कार्यक्रम में प्रो0 वाई0 विमला, प्रो0 सुरक्षापाल, प्रो0 वी0के0 रस्तौगी, प्रो0 एम0यू0 चराया, डॉ0 जे0पी0यादव, कवि ईष्वर चन्द्र गंभीर, सत्यपाल सत्यम, डॉ0 अषोक कुमार मिश्र, डॉ0 सीमा शर्मा, डॉ0 गजेन्द्र सिंह, अंजू, आरती, अमित, मोनू, ललित, कौषल, राहुल, निवेदिता, रेखा राणा, कुसुम, आदि उपस्थिति रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 रवीन्द्र कुमार एवं डॉ0 विपिन शर्मा ने किया।



साल भर के लिए लक्ष्य निर्धारित करें कि हमें क्या कैसे करना है
आइए शुरूआत करें .........( प्रो0 नवीन चन्द्र लोहनी )

Monday, March 28, 2011

अखवारों और वेब पर प्रतिक्रियाएं





पूंजी के केन्द्र में आ जाने के कारण आज सारे रिश्तें बेमानी हो गये हैं- प्रो0 अरूण होता


चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में केंद्रीय हिन्दी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, नई दिल्ली की ओर से वर्ष 2010-2011 की   प्राध्यापक व्याख्यान यात्रा कार्यक्रम के अन्तर्गत पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय, कलकत्ता के प्रो0 अरूण होता ने अपने व्याख्यान माला पहले दिन अपने विचार रखते हे कहा कि  ‘पंूजी के केन्द्र में आ जाने के कारण आज सारे रिश्तें बेमानी हो गये हैं या दूसरे शब्दों में कहें तो ‘सवहि नचावति पूंजी गुसाई’ की स्थिति पैदा हो गयी है। अब न आस्था है, न विश्वास है, न मूल्य है यहाँ तक कि भगवान भी एक प्रोडक्ट बन गया है। उनका मानना है कि प्रकृति के उपयोग और दोहन में अन्तर है, प्रकृति तो बनी ही मनुष्य के उपयोग के लिए है लेकिन आज उसका जिस प्रकार हम निरन्तर दोहन कर रहे हैं यह चिन्तनीय प्रश्न है।’
उक्त विचार पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय, कलकत्ता के प्रो0 अरूण होता ने ‘समकालीन हिन्दी कविता में पर्यावरण चेतना एवं बोध’ विषय पर हिन्दी विभाग में छात्र-छात्राओं को व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए। प्रो0 अरूण होता, केंद्रीय हिन्दी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2010-2011 की प्राध्यापक व्याख्यान यात्रा कार्यक्रम के अन्तर्गत हिन्दी विभाग,   चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में व्याख्यान देने आए हैं।
समकालीन हिन्दी कविता में पर्यावरण चेतना एवं बोध पर व्याख्यान देते हुए उन्होने कहा कि हमारे समकालीन हिन्दी कवि पर्यावरण संकट को किस रूप में देखते हैं, यह आज का विचारणीय प्रश्न है। उनका कहना था कि प्रकृति को छोड़कर संस्कृति और साहित्य विकसित नहीं हो सकता। औद्योगिक क्रान्ति प्रकृति और मानवीय संवेदना के मध्य सम्बन्ध विच्छेदित करने का कार्य करती है। यह आज की गम्भीर समस्या है। विकास के नाम पर यह कैसा विकास है जो हमें विनाश की ओर ले जा रहा है।
ग्लोबल वार्मिंग के लिए अगर कोई सर्वाधिक जिम्मेदार है तो वह अमेरिका है। जिसकी दादागिरी सम्पूर्ण विश्व पर चल रही हैं भूमण्डलीकरण के नारे के द्वारा पंूजीवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। पूंजी के दो चमचे हैं बाजार और उपभोक्ता। कई बार ग्लोबलाइजेशन को हम ‘वसुधैव कुटम्बकम्’ का  आधुनिक रूप मान लेते हैं लेकिन दोनों में अन्तर है क्योंकि यह भी ‘कर लो दुनियाँ मुट्ठी में’ की बात करता है। लेकिन यदि हम उसकी तह तक जाते हैं तो वहाँ भी बाजार और पूंजी की बात छुपी हुई है। वह पूरे विश्व को यूनविर्सल फोम में ढालकर एक जैसी संस्कृति विकसित करना चाहते हैं, जिससे सम्पूर्ण विश्व का एक जैसा खान-पान, पहनावा होगा जिसके परिणामस्वरूप विकसित देशों को मुनाफा प्राप्त होगा। उन्होंने समकालीन कविता से कई कविताओं के उदाहरण देकर यह समझाने का प्रयास किया कि समकालीन कविता अंधेरे एवं निराशा की बात नही करती अपितु अन्धेरों में भी उम्मीद की किरण जगाती हैं। अन्त में प्रो0 होता ने छात्र-छात्राओं के प्रश्नों के उत्तर देकर कई सूचनाओं एवं जानकारियों का आदन-प्रदान किया।

इसी क्रम में दूसरे दिन  प्रो0 अरूण होता ने कहा कि वैदिक काल से लेकर अब तक भारतीय भाषाओं में लिखे गए साहित्य को प्रायः भारतीय साहित्य माना जाता है। उन्होेेंने कहा कि वह सम्पूर्ण साहित्य भारतीय साहित्य में शामिल किया जाना चाहिए जिसकी संवेदना भारतीय है। उन्होंने कहा कि साहित्य पढ़ने की प्रवृति का विकास किया जाना चाहिए ताकि मनुष्य की मनुष्यता में वृद्धि हो सके।




 उन्होंने कहा जिन रचनाओं ने भारतीय जीवन मूल्य समाज संस्कृति का चित्रण हो वह भारतीय साहित्य है, भले ही वह किसी भी भाषा में लिखा गया हो। भारतीय साहित्य में मानवीय पक्ष के चित्रण को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि रचनाकारों ने ईश्वर से भी बड़ा मनुष्य को माना है और मानव जाति के हित के लिए मनुष्यता की महत्ता को स्थापित किया है।
रचनाकार चाहे किसी भी भाषा का हो वह समकालीन समाज और उसकी प्रवृतियों का सूक्ष्म चित्रण करता है। यही कारण है कि उडिया भाषा में लिखे फकीर मोहन के सन् 1897 के उपन्यास ‘छः बीघा जमीन’ और प्रेमचन्द के ‘गोदान’ में काफी कुछ समानताएं थी क्योंकि दोनों रचनाकारों ने अपने समय के समाज की संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया।
प्रो0 होता ने भाषा ने नाम पर साम्प्रदायिकता फैलाने की भर्त्सना करते हुए विश्व दृष्टि विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि साहित्य सौहाद्र एकता और सद्भाव की वृद्धि मंे सहायक है इसलिए साहित्य पढ़ने की प्रवृति को और विकसित किया जाना चाहिए।
हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो0 नवीन चन्द्र लोहनी ने प्रो0 अरूण होता तथा केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, नई दिल्ली को भी इस व्याख्यान माला में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में व्याख्यान आयोजित कराने पर धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस अवसर पर डॉ0 अशोक कुमार मिश्र ने कहा कि साहित्य मनुष्य को संवेदनशील बनाता है जिससे आधुनिक काल की समस्त समस्याओं का निवारण सम्भव है। कार्यक्रम में अंजू, अमित, ललित, निवेदिता, आदि छात्र-छात्राएं भी उपस्थित थे।



आप सभी का मंथन विचार पत्रिका के इन्टरनेट संस्करण में स्वागत है..

"कैमरे के फ़ोकस में - मंथन पत्रिका और विभागीय गतिविधियाँ " को ब्लॉग के बायीं ओर लिंक सूची में देखें .......