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Saturday, September 21, 2024

राजभाषा हिंदी : तकनीक और अनुवाद विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

 आज दिनांक 14 सितंबर 2024 को हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में हिंदी दिवस के अवसर पर राजभाषा हिंदी : तकनीक और अनुवाद विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कार्यक्रम अध्यक्ष प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा,  अध्यक्ष कला संकाय, मुख्य अतिथि प्रोफेसर कुमुद शर्मा, उपाध्यक्ष साहित्य अकादमी दिल्ली, विशिष्ट अतिथि श्री राजेंद्र सिंह, सूचना आयुक्त उत्तर प्रदेश, विशिष्ट अतिथि डॉ अमरनाथ अमर, पूर्व कार्यक्रम निर्माता निर्देशक दूरदर्शन और कार्यक्रम समन्वयक विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी और कार्यक्रम सचिव सहायक आचार्य डॉक्टर प्रवीण कटारिया रहे।

 इस अवसर पर पूर्व दिवस में आयोजित निबंध लेखन और आशु भाषण प्रतियोगिता में विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया साथ ही डॉक्टर महिपाल वर्मा पुरस्कार हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग की एम.ए. सत्र 23- 24 में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर्ता प्रथम दो विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया साथ ही शांति देवी राजकीय संगठक महाविद्यालय जेवर के बी.ए. की परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर्ता प्रथम दो विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। जिसमें प्रथम पुरस्कार  डॉक्टर महिपाल वर्मा पुरस्कार  डॉक्टर महिपाल वर्मा पुरस्कार रु 10 हजार और द्वितीय पुरस्कार रु5000 प्रदान किए गए। एम.ए. हिंदी से गरिमा सिंह ने प्रथम पुरस्कार और कीर्ति मिश्रा ने द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया और शांति देवी राजकीय संगठक महाविद्यालय जेवर से कुमारी वंदना ने प्रथम पुरस्कार और काजल त्यागी ने द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया।

कार्यक्रम अध्यक्ष प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि भाषा अपनी संस्कृति, आचरण और व्यवहार को लेकर चलती है। सरलता के नाम पर किसी भाषा की संस्कृति से छेड़छाड़ करना ठीक नहीं है। मातृभाषा के नाम पर हिंदी के साथ स्वच्छंदता पूर्ण व्यवहार करते हैं। हमें हिंदी की शुद्धता के प्रति सचेत होना चाहिए। प्राचीन भारत में भाषाओं का संघर्ष नहीं रहा। यूरोप की संकल्पना भाषाई संघर्ष पर आधारित है किंतु भारत की नहीं। सामान्य जीवन में हमें अपने हस्ताक्षर हिंदी में ही करने चाहिए, इससे हमारी पहचान निर्धारित होती है और हिंदी को मातृभाषा के रूप में गौरव मिलता है।

 कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रोफेसर कुमुद शर्मा ने कहा कि भाषा की कोठरियां नहीं हुआ करती। आजादी से पहले सभी स्वतंत्रता सेनानियों ने हिंदी को एकमत से अपनाया लेकिन राजभाषा बनते समय यह मुद्दा विरोध का मुद्दा बना और भाषा के राजभाषा, संपर्क भाषा, राष्ट्रभाषा आदि कई रूप बने और इसी विरोध का नतीजा यह रहा की 15 साल का हिंदी प्रशिक्षण समय हिंदी को दिया गया। वही हिंदी के लिए सबसे बड़ी अड़चन बना। बाद में हिंदी  भाषी भी हिंदी को पहचान ना सके। हिंदी की शक्ति और सामर्थ्य से मीडिया दौड़ा है। तकनीक के आने से हिंदी में रोजगार के नए क्षेत्र सृजित हुए हैं। हिंदी के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाएं भी तकनीक के साथ लगातार विकास कर रही हैं। फिल्में भी इस क्षेत्र में नए विकल्पों को सृजित कर रही है। विकसित भारत का आधार भारतीय भाषाएं ही बनेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी रोजगार के नए क्षेत्र का सृजन करती हैं। नया भारत भारतीय भाषाओं की गरिमा को लौटा रहा है। भारतीय भाषाओं के साथ ही विकसित भारत की संकल्पना साकार होगी।

 मुख्य अतिथि श्री राजेंद्र सिंह ने कहा कि मानव सभ्यता के विकास का मुख्य आधार भाषा रही हैं। भारत में सर्वाधिक जनसंख्या हिंदी बोलने वालों की है। किसी भी भाषा का विकास उसमें रोजगार की संभावनाओं से जुड़ा होता है और हिंदी में इसकी पर्याप्त संभावनाएं हैं।

मुख्य अतिथि डॉ अमरनाथ अमर ने कहा कि हिंदी के कई रूप हैं, साहित्य पठन-पाठन, मीडिया और व्यवहार में हिंदी अनेक रूपों में प्रयोग की जाती है। हिंदी शब्दकोश में विविधता है अनेक बोली और भाषाओं और विदेशी भाषाओं के शब्दों को हिंदी ने ग्रहण किया है। अनुवाद भाषा के प्रचार प्रसार का मुख्य माध्यम है। आकाशवाणी और दूरदर्शन में भी अनुवाद के पद है। दूरदर्शन में क्षेत्रीय भाषाओं के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं।

 कार्यक्रम समन्वयक और  विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा और लिपि पर महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं। अनुवाद के क्षेत्र में भी हिंदी में लगातार अनुवाद कार्य हो रहे हैं। रोजगार के क्षेत्र में भी अनुवाद ने नए क्षेत्र से हिंदी भाषा को परिचित कराया है। तकनीक के साथ जुड़कर हिंदी समसामयिक संदर्भों से जुड़ती है। हिंदी में लगातार नए शब्दकोश और सॉफ्टवेयर निर्माण के कार्य हो रहे हैं। इंटरनेट ने भी ट्रांसलेशन के द्वारा हिंदी में काम करना सुगम बनाया है। भारत सरकार भी तकनीक और हिंदी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। अनुवादिनी आदि सॉफ्टवेयर ने भारतीय भाषाओं में अनुवाद को सरल बनाया है। वैश्विक स्तर पर हिंदी में लगातार नए कार्य हो रहे हैं और हिंदी का भविष्य उज्जवल है।

कार्यक्रम का संचालन सहायक आचार्य डॉ प्रवीण कटारिया ने किया और सभी अतिथियों का वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापन सहायक आचार्य डॉक्टर अंजू ने किया।

 निबंध लेखन और आशु भाषण प्रतियोगिताओं में आशु भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान श्री संदीप मिश्रा, पादन प्रजनन एवं अनुवांशिकी विभाग, द्वितीय स्थान प्रियंका वर्मा, एमए भूगोल विभाग, तृतीय स्थान सुश्री पलक रावल बी. ए. एलएलबी विधि विभाग, सांत्वना पुरस्कार शुभम शर्मा एमएससी वनस्पति विज्ञान एवं रजत कोहली पीएचडी राजनीति विज्ञान विभाग ने प्राप्त किया।

निबंध लेखन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान सृष्टि मलिक एम. ए. प्रथम वर्ष संस्कृत विभाग, द्वितिय स्थान निक्की रानी बीएससी ऑनर्स कंप्यूटर साइंस विभाग, प्रिंसी चौहान एम. ए. हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, सांत्वना पुरस्कार आयुषी त्यागी एम.ए. हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग एवं लवि त्यागी बीएससी ऑनर्स रसायन विज्ञान विभाग ने प्राप्त किया। प्रथम पुरस्कार के रूप में सभी प्रतियोगियों को रु1000 द्वितीय पुरस्कार के रूप में रु750 तृतीय पुरस्कार के रूप में रु500 और सांत्वना पुरस्कार में रु250 नगद धनराशि प्रदान की गई।

हिंदी दिवस के अवसर पर प्रो. के.के शर्मा,  प्रोफेसर रविंद्र प्रताप राणा, प्रोफेसर विघ्नेश कुमार, डॉ अनुज अग्रवाल, डॉ आरती राणा, डॉ यज्ञेश कुमार, डॉ विद्यासागर सिंह, डॉ निर्देश, डॉ सुमित, विनय कुमार, पूजा यादव, पवन गोस्वामी, सचिन कुमार, रेखा सोम, विशाल, नेहा, प्रतीक्षा, प्रिंस, नेहा ठाकुर, एकता चौधरी, रिया सिंह, शौर्य सिंह, अक्षय मुकुट आदि उपस्थित रहे।






































































निबंध लेखन एवं आशु भाषण प्रतियोगिता का आयोजन


आज दिनांक 13 सितंबर 2024 को हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में हिंदी दिवस समारोह 2024 के अवसर पर समारोह के पूर्व दिवस पर

निबंध लेखन एवं आशु भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। निबंध प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के 17 विभागों से 33 विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की और आशु भाषण में 12 विभागों के 22 विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की। इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ आचार्य एवम विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी रहे। मुख्य अतिथि श्री राम किशोर उपाध्याय पूर्व आई.आर.ए.एस अधिकारी और निर्णायक मंडल में प्रोफेसर कविता त्यागी, मेरठ कॉलेज, डॉक्टर कविश्री, एन.ए.एस कॉलेज, मेरठ और वरिष्ठ पत्रकार प्रोफेसर रविंद्र प्रताप राणा रहे। 

कार्यक्रम का संचालन सहायक आचार्य डॉक्टर यज्ञेश कुमार ने किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि हिंदी दुनिया की बड़ी भाषा है। हम सभी को हिंदी अपनी मातृभाषा की भांति अपनाना चाहिए। हिंदी दिवस हिंदी के संवैधानिक अधिकार का स्मरण दिवस है। संविधान समिति में शामिल सदस्यों ने हिंदी को उसका उचित सम्मान प्रदान किया। अब हमारा और नवीन पीढ़ी का कर्तव्य है कि व्यवहार में भी हिंदी के प्रयोग को सुनिश्चित करें और भारतीय संस्कृति और साहित्य के विकास की परंपरा से खुद को जोड़ें। नई पीढ़ी के लिए विरासत में हिंदी को मजबूत भाषा की तरह आगे भेजें ताकि भारत की नवीन पीढ़ी हिंदी में अपना भविष्य देख सके। शुद्धता किसी भी भाषा का पैमाना नहीं होती।

 मुख्य अतिथि श्री राम किशोर उपाध्याय ने कहा कि इस प्रकार के प्रतियोगी कार्यक्रमों से हमारी अपनी भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ती है। अभिव्यक्ति की भाषा सरल होनी चाहिए। कोई भी भाषा तब तक समृद्ध नहीं होती जब तक उसमें अन्य भाषाओं के शब्दों को शामिल नहीं किया जाता। इससे अभिव्यक्ति की व्यापकता का विस्तार होता है। हिंदी में बोलने वालों की संख्या अरबों में है लेकिन हिंदी भाषा में अभी तक कोई नोबेल पुरस्कार नहीं मिल पाया है; ऐसे उत्कृष्ट साहित्य लेखन की संभावना अभी भी हिंदी में है। हिंदी के लिए कथनी से अधिक करनी की आवश्यकता है। निर्णायक मंडल में प्रोo कविता त्यागी ने कहा कि सर्वप्रथम जिन लोगों ने हिंदी को राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित किया उनमें अहिंदी भाषी लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही इसलिए हिंदी किसी क्षेत्र का मुद्दा नहीं है बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता की पहचान है। विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर गंभीर रूप से विचार अभिव्यक्ति की। विद्यार्थियों को लोक भाषा का प्रयोग भी अपने विचार अभिव्यक्ति में करना चाहिए।

प्रोo रविंद्र प्रताप राणा ने कहा कि हमें अपनी बात करते समय छोटे-छोटे वाक्य में अपनी बात को स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त करना चाहिए। लंबे वाक्य से विचार में अस्पष्टता और बोझिलता आती है। सोशल मीडिया में क्षेत्रीय बोलियों को अपार सफलता मिली है। विभिन्न व्यवसायों से जुड़े लोग क्षेत्रीय भाषाओं में सोशल मीडिया पर सफल हो रहे हैं। हिंदी अन्य भाषाओं से भी शब्द ग्रहण करती रही है। देश की स्थानीय बोलीयों के शब्दकोष को भी हिंदी में शामिल किया जाना चाहिए। साहित्य जटिल, परिष्कृत और बोझिल शब्दों की ओर झुक रहा है हमें देशज बोलियों के शब्दों और साहित्य को भी अपनाना चाहिए।

 डॉ कविश्री ने कहा की प्रतियोगिता में तत्काल विषय चयन होने के बावजूद भी विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति क्षमता मजबूत रही। विद्यार्थियों को अपनी भाषा मे शब्दकोश को बढ़ाना चाहिए जिससे उनकी अभिव्यक्ति और अधिक मजबूत बन सके। प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के कौशल और योग्यताओं को निखारने का काम करती हैं।

 स्टेट बैंक के पूर्व सहायक महाप्रबंधक श्री भारत भूषण ने कहा कि हमें अपनी हिंदी को अपनाना है। अपनी बोली कौरवी का मान करना है। हिंदी को बोलने में शर्म नहीं करनी चाहिए हिंदी हमारा गर्व है और इसे गर्व के साथ ही अपनी भाव अभिव्यक्ति और विचार अभिव्यक्ति के लिए माध्यम बनाएं।

सभी अतिथियों वक्ताओं और उपस्थित हिंदी प्रेमियों का धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव, सहायक आचार्य डॉ प्रवीण कटारिया ने किया।

प्रतियोगिताओं का पुरस्कार वितरण कल हिंदी दिवस के मुख्य कार्यक्रम संगोष्ठी: राजभाषा हिंदी: तकनीक और अनुवाद में माननीय कुलपति प्रोo संगीता शुक्ला जी द्वारा किया जाएगा।

इस अवसर पर डॉ आरती राणा, डॉ अंजु, डॉ विद्यासागर सिंह, विनय कुमार, पूजा यादव, सचिन कुमार, रेखा सोम, ख्याति भारद्वाज, सृष्टि, प्रिंसी, आयुषी त्यागी, शुभम शर्मा आदि शामिल रहे।

आज दिनांक 13 सितंबर 2024 को हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में हिंदी दिवस समारोह 2024 के अवसर पर समारोह के पूर्व दिवस पर

निबंध लेखन एवं आशु भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। निबंध प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के 17 विभागों से 33 विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की और आशु भाषण में 12 विभागों के 22 विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की। इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ आचार्य एवम विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी रहे। मुख्य अतिथि श्री राम किशोर उपाध्याय पूर्व आई.आर.ए.एस अधिकारी और निर्णायक मंडल में प्रोफेसर कविता त्यागी, मेरठ कॉलेज, डॉक्टर कविश्री, एन.ए.एस कॉलेज, मेरठ और वरिष्ठ पत्रकार प्रोफेसर रविंद्र प्रताप राणा रहे। 

कार्यक्रम का संचालन सहायक आचार्य डॉक्टर यज्ञेश कुमार ने किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि हिंदी दुनिया की बड़ी भाषा है। हम सभी को हिंदी अपनी मातृभाषा की भांति अपनाना चाहिए। हिंदी दिवस हिंदी के संवैधानिक अधिकार का स्मरण दिवस है। संविधान समिति में शामिल सदस्यों ने हिंदी को उसका उचित सम्मान प्रदान किया। अब हमारा और नवीन पीढ़ी का कर्तव्य है कि व्यवहार में भी हिंदी के प्रयोग को सुनिश्चित करें और भारतीय संस्कृति और साहित्य के विकास की परंपरा से खुद को जोड़ें। नई पीढ़ी के लिए विरासत में हिंदी को मजबूत भाषा की तरह आगे भेजें ताकि भारत की नवीन पीढ़ी हिंदी में अपना भविष्य देख सके। शुद्धता किसी भी भाषा का पैमाना नहीं होती।

 मुख्य अतिथि श्री राम किशोर उपाध्याय ने कहा कि इस प्रकार के प्रतियोगी कार्यक्रमों से हमारी अपनी भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ती है। अभिव्यक्ति की भाषा सरल होनी चाहिए। कोई भी भाषा तब तक समृद्ध नहीं होती जब तक उसमें अन्य भाषाओं के शब्दों को शामिल नहीं किया जाता। इससे अभिव्यक्ति की व्यापकता का विस्तार होता है। हिंदी में बोलने वालों की संख्या अरबों में है लेकिन हिंदी भाषा में अभी तक कोई नोबेल पुरस्कार नहीं मिल पाया है; ऐसे उत्कृष्ट साहित्य लेखन की संभावना अभी भी हिंदी में है। हिंदी के लिए कथनी से अधिक करनी की आवश्यकता है। निर्णायक मंडल में प्रोo कविता त्यागी ने कहा कि सर्वप्रथम जिन लोगों ने हिंदी को राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित किया उनमें अहिंदी भाषी लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही इसलिए हिंदी किसी क्षेत्र का मुद्दा नहीं है बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता की पहचान है। विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर गंभीर रूप से विचार अभिव्यक्ति की। विद्यार्थियों को लोक भाषा का प्रयोग भी अपने विचार अभिव्यक्ति में करना चाहिए।

प्रोo रविंद्र प्रताप राणा ने कहा कि हमें अपनी बात करते समय छोटे-छोटे वाक्य में अपनी बात को स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त करना चाहिए। लंबे वाक्य से विचार में अस्पष्टता और बोझिलता आती है। सोशल मीडिया में क्षेत्रीय बोलियों को अपार सफलता मिली है। विभिन्न व्यवसायों से जुड़े लोग क्षेत्रीय भाषाओं में सोशल मीडिया पर सफल हो रहे हैं। हिंदी अन्य भाषाओं से भी शब्द ग्रहण करती रही है। देश की स्थानीय बोलीयों के शब्दकोष को भी हिंदी में शामिल किया जाना चाहिए। साहित्य जटिल, परिष्कृत और बोझिल शब्दों की ओर झुक रहा है हमें देशज बोलियों के शब्दों और साहित्य को भी अपनाना चाहिए।

 डॉ कविश्री ने कहा की प्रतियोगिता में तत्काल विषय चयन होने के बावजूद भी विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति क्षमता मजबूत रही। विद्यार्थियों को अपनी भाषा मे शब्दकोश को बढ़ाना चाहिए जिससे उनकी अभिव्यक्ति और अधिक मजबूत बन सके। प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के कौशल और योग्यताओं को निखारने का काम करती हैं।

 स्टेट बैंक के पूर्व सहायक महाप्रबंधक श्री भारत भूषण ने कहा कि हमें अपनी हिंदी को अपनाना है। अपनी बोली कौरवी का मान करना है। हिंदी को बोलने में शर्म नहीं करनी चाहिए हिंदी हमारा गर्व है और इसे गर्व के साथ ही अपनी भाव अभिव्यक्ति और विचार अभिव्यक्ति के लिए माध्यम बनाएं।

सभी अतिथियों वक्ताओं और उपस्थित हिंदी प्रेमियों का धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव, सहायक आचार्य डॉ प्रवीण कटारिया ने किया।

प्रतियोगिताओं का पुरस्कार वितरण कल हिंदी दिवस के मुख्य कार्यक्रम संगोष्ठी: राजभाषा हिंदी: तकनीक और अनुवाद में माननीय कुलपति प्रोo संगीता शुक्ला जी द्वारा किया जाएगा।

इस अवसर पर डॉ आरती राणा, डॉ अंजु, डॉ विद्यासागर सिंह, विनय कुमार, पूजा यादव, सचिन कुमार, रेखा सोम, ख्याति भारद्वाज, सृष्टि, प्रिंसी, आयुषी त्यागी, शुभम शर्मा आदि शामिल रहे।

                                        




























Wednesday, July 24, 2024

टैबलेट एवं स्मार्टफोन वितरण

 दिनांक 16 जुलाई 2024 को हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग एवं भूगोल विभाग के सौजन्य से टैबलेट एवं स्मार्टफोन वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसकी संरक्षक माननीय कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला, प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा, अध्यक्ष कला संकाय, मुख्य अतिथि माननीय गौरव चौधरी, अध्यक्ष जिला पंचायत मेरठ विशिष्ट अतिथि डॉक्टर सुशील कुमार सिंह, प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद रहे।विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी, वरिष्ठ आचार्य भी कार्यक्रम में शामिल रहे।

        हिंदी विभाग से एमए द्वितीय वर्ष की छात्रा राखी और राखी और शोभा को टैबलेट प्रदान किया गया.                            






सिनेमा और साहित्य के आपसी संबंध पर वार्ता

 आज दिनांक 20 जुलाई 2024 को हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में प्रोफेसर पुनीत बिसारिया, आचार्य, हिंदी विभाग, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी ने शिक्षकों, विद्यार्थियों के साथ सिनेमा और साहित्य के आपसी संबंध पर वार्ता की।

स्वागत प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी, वरिष्ठ आचार्य एवं अध्यक्ष, हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग ने किया उन्होंने बताया कि उन्होंने 'द फिल्म फाउंडेशन ट्रस्ट' की स्थापना की है। जिसके अंतर्गत फिल्म यूनिवर्सिटी की स्थापना करना ट्रस्ट का उद्देश्य है। जिससे बेहतरीन विषयों पर शॉर्ट फिल्म, डॉक्युमेंट्री और फिल्में बनाकर उनसे समाज को कोई बेहतर संदेश दिया जा सके। उन्होंने कहा कि सिनेमा समाज का सबसे सशक्त माध्यम है अपनी बात पहुंचाने का। सिनेमा विस्तृत माध्यम है। आज के समय में सिनेमा हमारे जीवन का अभिन्न अंग है, जीवन के सुख-दुख, हंसी-खुशी, जन्म मृत्यु सभी का हिस्सेदार सिनेमा है। सिनेमा ने मनुष्य को भीतर तक प्रभावित किया है। मिर्जापुर और पंचायत जैसी वेब सीरीज लोकप्रियता के बड़े आयाम स्थापित करती है क्योंकि उनकी सामाजिक स्वीकार्यता बनती है। आजादी के आंदोलन में भी सिनेमा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समय के साथ सिनेमा अपने उद्देश्यों से भटक गया। सिनेमा में सस्तापन, नग्नता और मसाला शामिल हो गया। जैनेंद्र ने कहा कि साहित्य दूध और सिनेमा ताड़ी है। जिस कारण साहित्य और सिनेमा की दूरी बनी। साहित्य और सिनेमा का संबंध बहुत पुराना है। सिनेमा बिना साहित्य के जिंदा नहीं रह सकता। जो सिनेमा में 2 से 3 घंटे में अपनी बात को सफलतापूर्वक दिखा सकता है वही सिनेमा में सफल हो सकता है। साहित्यकार में कैमरे की आंख से कहानी को देखने की योग्यता होनी चाहिए। जनता की नब्ज़ पकड़नी चाहिए। फिल्मकार को कहानी की आत्मा से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। गीतकार फिल्मी घटनाक्रम को समझते हैं इसलिए वह फिल्मों में सफल रहे। फिल्म रोजगार का एक मजबूत विकल्प है। साहित्य और फिल्म भी समझ भी होनी चाहिए साहित्य के साथ जोड़कर फिल्में सफल हो सकती हैं।

धन्यवाद ज्ञापन डॉक्टर अंजू ने किया इस अवसर पर विभाग के शिक्षक डॉ प्रवीण कटारिया, डॉ आरती राणा, डॉक्टर यज्ञेश कुमार, शोधार्थियों में  विनय कुमार, पूजा, पूजा यादव, सचिन कुमार, रेखा सोम और एम ए के विद्यार्थियों में बॉबी, प्रतीक्षा, एकता, रिया, विक्रांत, नेहा, प्रिंसी आदि छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

                                         




विदाई समारोह का आयोजन

 हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग में 26 जून 2024 को एम० ए० द्वितीय वर्ष  के विदाई समारोह का आयोजन किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो० नवीन चंद्र लोहनी द्वारा सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की गई। इस अवसर पर विभाग में अनेक रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसमें समस्त छात्र - छात्राओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया । निर्णायक मंडल सहायक आचार्य डॉ अंजू, डॉ प्रवीण कटारिया, डॉ यज्ञेश कुमार द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं के आधार पर एम० ए० द्वितीय वर्ष  ऋषभ स्वामी मिo फेयरवेल और कीर्ति मिश्रा मिस फेयरवेल चुनी गई।  अंत में प्रो० लोहनी ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया तथा  उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम का संचालन एम० ए० प्रथम वर्ष की छात्रा नेहा ठाकुर और रिया सिंह ने किया।  हिंदी विभाग के सहायक आचार्य  डॉ आरती राणा, विभाग की पूर्व छात्र गीता कुमारी असिस्टेंट प्रोफेसर भी उपस्थित रही.  हिंदी विभाग के शोधार्थी  विनय कुमार, पूजा, सचिन कुमार, अंकिता तिवारी, पूजा यादव, रेखा सोम  व कार्यालय स्टाप शैलेश जोशी, भुवन नेगी, नरेश कुमार, विद्यार्थियों में अंजलि सूद, नेहा रानी, प्रिंस, उज्बा  प्रतीक्षा, शौर्य सिंह, रिया सिंह, एकता मलिक आदि उपस्थित रहे।

                       







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