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Tuesday, August 22, 2023

प्री॰ पीएच॰डी॰ कोर्स वर्क 2023 का सत्रारम्भ

दिनांक 19.08.2023 को हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग में प्री॰ पीएच॰डी॰ कोर्स वर्क 2023 का सत्रारम्भ सम्पन्न हुआ। कक्षा प्रो॰ एम॰पी॰ शर्मा, सेवानिवृत अध्यक्ष, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, दिल्ली एवं प्रो॰ कुमुद शर्मा, अध्यक्ष, हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली एवं उपाध्यक्ष, हिंदी अकादमी, दिल्ली के व्यक्तव्यों से आरम्भ हुई। संयोजक प्रो॰ नवीन चन्द्र लोहनी अध्यक्ष हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग रहें।

शोध प्रविधि और प्रक्रिया पर विद्यार्थियों से वार्ता करते हुए प्रो॰ एम॰पी॰ शर्मा ने कहा कि पीएच॰ डी॰ ज्ञान विचार की परिपक्वता के साथ रोजगार से जुडी उपाधि भी है। विस्तृत ज्ञान क्षेत्र में यह उपाधि एक दिशा देती है और उस दिशा को परिपक्व बनाती है। इसलिए शोध कार्य गम्भीर वैचारिक कार्य है। अन्तर्विरोध किसी लेखक की आलोचना और लेखन शैली की कमी नहीं है, बल्कि शोध के द्वारा हम इन्हीं अन्तर्विरोधों के कारणों को खोजते हैं। शोध कार्य केवल पुस्तकालय तक सीमित नहीं है, बल्कि तथ्य तक पहुँचना है। 

प्रो॰ कुमुद शर्मा ने कहा कि हिंदी साहित्य ऐसा विषय है, जिससे समाज से संबंधित प्रत्येक विषय चाहे सामाजिक, आर्थिक और मनोविज्ञान हो सभी शामिल हैं। शोध से तात्पर्य है बार-बार खोज करना। शोध, उत्तर शोध कार्य और समकालीन विषयों से संवाद करना है। साहित्य संवाद की निरंतरता में लिखा जाता है। शोध, भूत, वर्तमान और भविष्य से जुड़ा होता है। शोध राष्ट्र की समुन्नति के संदर्भ में होना चाहिए।

शोध एक प्रक्रिया है, जो श्रमसाध्य है। शोध ऐसी जमीन है, जो आप संपूर्ण जीवन फल पाऐंगे। शोध में बौद्धिक ईमानदारी की बहुत आवश्यकता है। मौलिक अर्थ के लिए साहित्य के मूल पाठ से पाठक को टकराना पड़ता है। नई शिक्षा नीति में भी गुणवत्ता पूर्ण शोध और समाज सापेक्ष शोध पर जोर दिया गया है। शोध का उपयोगी होना जरूरी है। कालजयी कृतियाँ समय के साथ यात्रा करती हैं। युगबोध को साहित्यकार पकड़ता है। शोधार्थी को भी युगबोध को पकड़कर शोध करना चाहिए। 

कक्षा में प्रो॰ आभा शर्मा, विभाग के शिक्षक, शोधार्थी एवं प्री॰ पीएच॰ के विद्यार्थी शामिल रहे।






Wednesday, August 2, 2023

वेबगोष्ठी ''आज के सवाल और प्रेमचंद का साहित्य'' का आयोजन

दिनाँक 30 जुलाई 2023 को कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती  की पूर्व संध्या के अवसर पर हिंदी एवम आधुनिक भारतीय भाषा विभाग द्वारा वेबगोष्ठी ''आज के सवाल और प्रेमचंद का साहित्य'' का आयोजन किया गया।

विभागाध्यक्ष प्रो नवीन चन्द्र लोहनी ने गोष्ठी की अध्यक्षता की। विषय विशेषज्ञ प्रो जितेंद्र श्रीवास्तव, इग्नू, नई दिल्ली और प्रो रामवक्ष जाट, जेएनयू, नई दिल्ली रहे।

गोष्ठी का संचालन डॉ आरती राणा सहायक आचार्य (संविदा) ने किया।

प्रो नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि प्रेमचंद विरले साहित्यकार है प्रेमचंद के पात्र, कथ्य, घटनाएं समय के साथ चलते हैं। साहित्यकार कालजयी मुद्दों को उठाते हैं इस रूप में प्रेमचंद मानवीय संवेदना के कथाकार हैं। प्रेमचंद ने नैतिकता, राजनीति पक्षधरता, सामाजिक न्याय, अशिक्षा, गरीबी, किसानों की  उन समस्याओं को अपने लेखन का माध्यम बनाया जो आज के समय के बड़े सवाल  समाज में बने हुए हैं। वह जीवन के प्रति सजग रचनाकार हैं प्रेमचंद भारतीय संस्कृति और समाज के जीवन मूल्यों को स्थापित करते हैं प्रेमचंद आमजन के कथाकार हैं।


प्रो जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि प्रासंगिकता का प्रश्न जटिल प्रश्न है प्रेमचंद आज के समय में प्रासंगिक हैं। प्रेमचंद एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जो समस्या मुक्त हो। प्रेमचंद के समय के सवाल आज भी है जातीय व्यवस्था का प्रश्न, सांप्रदायिकता का प्रश्न, सामंती व्यवस्था, भ्रष्टाचार, औद्योगिकीकरण, दहेज प्रथा स्त्री जीवन के प्रश्न, दहेज प्रथा अनमेल विवाह, विधवा विवाह की समस्याएं, जाति व्यवस्था आदि अनेक प्रश्न है जिन्हें प्रेमचंद ने अपनी लेखनी का आधार बनाया किंतु आज बड़े सवाल बनकर हमारे समाज में हैं। प्रेमचंद के साहित्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि प्रेमचंद के वैचारिक लेखन में उनके विचार मुखरित होते हैं, स्त्री जीवन के प्रश्नों को उठाते हुए प्रेमचंद स्त्री शिक्षा पर जोर देते हैं और स्त्री को मजबूत बनाने के लिए और उसके जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रेमचंद  प्रतिबद्ध है। रंगभूमि  उपन्यास में औद्योगीकरण, पूंजीपतियों द्वारा शोषण प्रेमचंद दिखाते हैं तो आज के समय में शोषक और शोषण के रूप कदाचित बदल गए हो लेकिन कहीं ना कहीं आज भी स्थिति वही है। गोदान में मालती के रूप में आधुनिक स्त्री को अभिव्यक्त करते हैं जो स्वतंत्रता की बात करती है, सक्षम है और अपने अधिकारों के प्रति सचेत हैं। प्रेमचंद को समझने के लिए उनकी वैचारिक विरासत को समझने की आवश्यकता है। प्रेमचंद समाज निर्माण में बाधक इन तमाम समस्याओं को अपने लेखन में अभिव्यक्त करते हुए एक ऐसे समाज, राष्ट्र की कल्पना करते हैं जो इन सभी समस्याओं से मुक्त हो। जाति व्यवस्था का प्रश्न को  एक बड़ी समस्या के रूप में अपने लेखन में उजागर करते हैं और  नए भारत के निर्माण में  इस समस्या को बड़ी बाधा  मानते हैं। किसान जीवन की समस्याओं को प्रेमचंद अपने साहित्य में उठाते हैं आज शोषण का स्वरूप बदल गया है और किंतु समस्याएं लगभग उसी रूप में आज भी बनी हुई है।


प्रो रामवक्ष जाट ने कहा कि  प्रेमचंद की वैचारिक पृष्ठभूमि में आधुनिकरण का विचार रहा है। शिक्षा आधुनिकरण का द्वार खोलती है इस रूप में प्रेमचंद ने अपने पात्रों में विशेष रूप से स्त्री पात्रों को शिक्षा के प्रति सचेत दिखाया है । प्रेमचंद एक समस्या मुक्त समाज का समर्थन करते हैं जहां अंधविश्वास मुक्त समाज हो।स्त्री चिंता उनकी लेखन का प्रमुख आधार रही  है प्रेमचंद एक दूरदर्शी रचनाकार थे स्त्रियों को संपत्ति के अधिकार का समर्थन करते हुए उन्होंने कई कहानियां लिखी जिसके फलस्वरूप कानून में परिवर्तन भी हुए संपत्ति में स्त्रियों के अधिकार सुरक्षित रहे। हाशिए के लोगों के चरित्र उनके कथानक  का विषय बने हैं। प्रेमचंद अपने साहित्य में अंतिम निष्कर्ष नहीं देते ।  विशेष रूप से सीमांत किसानों की समस्याओं को प्रेमचंद ने अपने उपन्यासों में बहुत शिद्दत से अभिव्यक्त किया है और आज के समाज में वह समस्याएं अपने परिवर्तित स्वरूप में हमें दिखाई दिखाई देती है


गोष्ठी में डॉ अनुज अग्रवाल, डॉ अंजू, डॉ प्रवीण कटारिया, डॉ विद्यासागर सिंह, डॉ निर्देश चौधरी, डॉ राजेश कुमार, डॉ धर्मेंद्र भाटी, डॉ महेश पालीवाल,  डॉ मोनू सिंह, डॉ रविंद्र राणा, डॉ विवेक सिंह, डॉ योगेंद्र सिंह , डॉ हरीश कसना, डॉ सुमित नागर, पूजा, अंकिता तिवारी, पूजा यादव, गीता संदीप कुमार आदि शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी ऑनलाइन जुड़े।

















डॉक्टर महिपाल वर्मा स्मृति पुरस्कार

 चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में  नॉटिंघम, ब्रिटेन में पांच दशक निवास कर रही प्रवासी हिंदी रचनाकार एवं संस्कृति कर्मी श्रीमती जय वर्मा ने विश्वविद्यालय परिसर के हिंदी स्नातकोत्तर में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 2 विद्यार्थियों एवं राजकीय महाविद्यालय (संघटक महाविद्यालय) जेवर गौतम बुद्ध नगर (रबूपुरा) में हिंदी में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले तृतीय वर्ष के स्नातक उपाधि धारक 2 विद्यार्थियों के लिए पुरस्कार प्रदान करने हेतु विश्वविद्यालय की मा. कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला जी को चेक भेंट किया।

इस धनराशि के ब्याज से प्रतिवर्ष 4 विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। यह पुरस्कार  हिंदी में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 4 विद्यार्थियों को 2023 -24 से मिलेगा । पुरस्कार जय वर्मा के पति एवं सुप्रसिद्ध चिकित्सक "डॉक्टर महिपाल वर्मा स्मृति पुरस्कार" के नाम से जाना जाएगा । 


इसके बाद उन्होंने हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग में शिक्षकों और  विद्यार्थियों से भी मुलाकात की और उनकी ब्रिटेन के हिंदी कहानीकारों पर प्रकाशित पुस्तक पर भी चर्चा की।





यूजीसी नेट परीक्षा में सफलता

 हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के तीन पुरातन विद्यार्थियों ने यूजीसी नेट परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।

एम.ए. 2021-23 के विद्यार्थी काजल और शिवम एवम् एमफिलo की पूर्व छात्रा सुरभि ने नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है। 

तीनों विद्यार्थियों को विभाग के शिक्षकों एवं विभाग के अध्यक्ष प्रो0 नवीन चंद्र लोहनी ने बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।





Monday, July 10, 2023

विदाई समारोह का आयोजन

 हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग में 27 जून 2023 को एम० ए० द्वितीय वर्ष तथा बी०ए० तृतीय वर्ष के विदाई समारोह का आयोजन किया गया। विभाग में पधारे अतिथिगण डॉ मीनाक्षी सक्सेना ,अध्यक्ष हिंदी विभाग, एम० एम० एच० कॉलेज गाजियाबाद, डॉ मधु शर्मा, अध्यक्ष हिंदी विभाग,  एन०ए०एस० कॉलेज मेरठ एवं विभागाध्यक्ष व संकायाध्यक्ष कला प्रो० नवीन चंद्र लोहनी द्वारा सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की गई। साथ ही विभागाध्यक्ष ने पुष्पगुच्छ देकर अतिथियों का स्वागत व सम्मान किया । इस अवसर पर विभाग में अनेक रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसमें समस्त छात्र - छात्राओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया । निर्णायक मंडल सहायक आचार्य डॉ अंजू, डॉ प्रवीण कटारिया, डॉ यज्ञेश कुमार द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं के आधार पर एम० ए० द्वितीय वर्ष की छात्रा काजल को मिस फेयरवेल तथा बी०ए० तृतीय वर्ष के छात्र शौर्य को मिस्टर फेयरवेल घोषित किया गया।  अंत में प्रो० लोहनी ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया तथा  उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम का संचालन एम० ए० प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों कीर्ति मिश्रा और ऋषभ स्वामी ने किया व शोधार्थी पूजा कसाना ने धन्यवाद ज्ञापन देकर सभी का आभार व्यक्त किया। हिंदी विभाग के सहायक आचार्य  डॉ आरती राणा,  हिंदी विभाग के शोधार्थी मोहनी कुमार, विनय कुमार, पूजा यादव  व कार्यालय स्टाप शैलेश जोशी, भुवन नेगी, सुमित तोमर, नरेश कुमार, प्रेम सागर,एम० ए० के शिवम, राधा, राखी, प्रिंस, प्रतीक्षा, व बी०ए० के निकुंज, आयुषी, अपूर्वा आदि विद्यार्थी उपस्थित रहे।









 

केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा द्वारा आयोजित दो दिवसीय 'भाषा उत्सव' में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की.

 

हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से विभाग अध्यक्ष महोदय प्रोफेसर नवीनचंद्र लोहनी एवं  असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अंजू के नेतृत्व में एमओयू के तहत विभागीय विद्यार्थी केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा द्वारा आयोजित दो दिवसीय भाषा उत्सव जो दिनांक 23 एवं 24 मई 2023 को आयोजित किया गया में शामिल हुए।







Tuesday, May 9, 2023

शैक्षिक भ्रमण

 दिनांक  २५ मार्च २०२३ को विभागीय शैक्षिक टूर हरिद्वार और ऋषिकेश गया जिसमें विद्यार्थियों ने सिखने के साथ आनंद भी लिया। 

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार, हर की पौड़ी और ऋषिकेश के दर्शनीय स्थलों का भ्रमण किया। 




















परिचर्चा

 हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग,

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ
दिनांक : 12/04/2023
आज दिनांक 12 अप्रैल 2023 को हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में एक परिचर्चा आयोजित की गई।  
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो० वाई० विमला, वरिष्ठ आचार्य, वनस्पति विज्ञान विभाग ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ० मृदुल कीर्ति, आस्ट्रेलिया, वरिष्ठ प्रवासी साहित्यकार एवं अनुवादक, विशिष्ट अतिथि डॉ० नंद कुमार, पूर्व प्राचार्य, एस०एस०एस०एस० कालेज, मेरठ, डॉ० इन्दु झुनझुनवाला, बैंगलोर, श्रीचन्दा प्रहलादका, कोलकाता, डॉ० मंजरी पाण्डेय, वाराणसी, डॉ० रचना शर्मा, वाराणसी, सान्निध्य प्रो० नवीन चन्द्र लोहनी, संकायाध्यक्ष कला एवं अध्यक्ष हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो० वाई० विमला, वरिष्ठ आचार्य वनस्पति विज्ञान विभाग ने कहा कि बडे़ रचनाकारों की कृतियाँ विद्यार्थियों के लिए सदैव प्रेरणा का काम करती है और समाज को सकारात्मकता की ओर मोड़ती है।
मुख्य अतिथि डॉ० मृदुला कीर्ति, वरिष्ठ साहित्यकार एवं अनुवाद ने कहा कि ज्ञान का उद्देश्य ऋत् तक पहुँचना है। ब्रह्म ज्ञान का अर्थ मुक्ति तक पहुंचना है।
विशिष्ट अतिथि डॉ० नंद कुमार, पूर्व प्राचार्य, एस०एस०एस०एस० कालेज, मेरठ ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में हिंदी को स्थान मिला। देववाणी अब जन वाणी बनी है। कलम की ताकत, तलवार से ज्यादा ताकतवर होती है। हृदय ही हृदय की भाषा समझ सकता है।
विशिष्ट अतिथि डॉ० इन्दु झुनझुनवाला, बैंगलोर ने कहा कि शब्दों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश निहित हैं, शब्दों में सृजन, पालन और संहार भी निहित है। अनुभव में साथ शब्द और अभिव्यक्ति का महत्व पता चलता है।
विशिष्ट अतिथि डॉ० मंजरी पाण्डेय, वाराणसी ने हिंदी के महत्व को लेकर उन्होंने कुछ कविताएं पढ़ी उन्होंने कहा
जिसने हिंदी साधी, सब साध लिया वो जहान, जन-जन की ये भाषा, जन-मन की ये पहचान
विशिष्ट अतिथि डॉ० रचना शर्मा, वाराणसी ने कहा कि अपनी संस्कृति के प्रति आत्मभिमान होना चाहिए। मनोज कुमार की फिल्म पूरब और पश्चिम का गीत ‘‘जब जीरो दिया मेरे भारत ने’’ भारतीय संस्कृति को व्याख्यायित करता है हमारे हिंदी साहित्यकारों में पुर्नपाठ भी आवश्यकता है। जिससे ज्ञान में आधुनिक कसौटी पर कसा जा सके।
विशिष्ट अतिथि श्रीचन्दा प्रहलादका, कोलकाता ने विद्यार्थियों के लिए देशभक्ति और प्रेरणास्पद कविताओं का पाठ किया।
‘वतन पर मरने वालों का घड़ी भर का फसाना है,
हथेली पर सजा चलते हैं ये प्राण, वतन पर मरने वालों की यही है पहचान’
प्रो० नवीन चन्द्र लोहनी, संकायाध्यक्ष कला एवं अध्यक्ष हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग ने कहा कि साहित्य रचना समाज निर्माण की भूमिका होती है। इसलिए साहित्य सृजन करने वाला व्यक्ति सामान्य व्यक्तित्व से बड़ा होता है और अनुकरणीय होता है।
अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन डॉ० अंजू, सहायक आचार्य (संविदा) ने किया।
कार्यक्रम का संचालन पूजा यादव, शोधार्थी, हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग ने किया।
कार्यक्रम में डॉ० आरती राणा, डॉ० विद्यासागर सिंह, डॉ० यज्ञेश कुमार, डॉ० प्रवीन कटारिया, विनय कुमार, कु० पूजा, सचिन, उपेन्द्र, शौर्य, बॉबी, प्रिंसी, अपूर्वा, गरिमा, प्रियंका, प्रतीक्षा, प्रिंस, शिवन, उसबा, अफसा, शीबा, राखी, अंजली, आदि उपस्थित रहे।














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